सीमेन एनालिसिस टेस्ट हालोल: SQA एनालाइज़र और पैथोलॉजिस्ट की जाँच
सिटी पैथोलॉजी लेबोरेटरी, हालोल में सीमेन एनालिसिस कैसे होता है — सैंपल कैसे दें, SQA सीमेन एनालाइज़र क्या मापता है और पैथोलॉजिस्ट हर रिपोर्ट क्यों वेरिफाई करते हैं।
सीमेन एनालिसिस से क्या पता चलता है
जब गर्भधारण में कठिनाई हो रही हो, तो डॉक्टर सबसे पहले जो जाँच बताते हैं उनमें सीमेन एनालिसिस प्रमुख है। नसबंदी के बाद और फर्टिलिटी उपचार से पहले भी यह जाँच की जाती है। यह एक सरल जाँच है, फिर भी एक साथ कई बातें बताती है — शुक्राणुओं की संख्या पर्याप्त है या नहीं, उनकी गति कैसी है और उनकी बनावट सामान्य है या नहीं।
रिपोर्ट को अंतिम फैसला न मानें। बुखार, बीमारी, तनाव, अत्यधिक गर्मी और कुछ दवाइयाँ नतीजों को अस्थायी रूप से बदल सकती हैं, इसलिए डॉक्टर अक्सर कुछ सप्ताह बाद जाँच दोहराने को कहते हैं।
सैंपल कैसे देना चाहिए
- जाँच से पहले लगभग 2 से 5 दिन का संयम रखें — इससे कम या बहुत अधिक अंतर दोनों रिपोर्ट बिगाड़ते हैं।
- सैंपल केवल लैब से मिले स्टेराइल कंटेनर में लें; साबुन, पानी या साधारण डिब्बा शुक्राणुओं को नष्ट कर देता है।
- लैब में उपलब्ध कलेक्शन रूम बेहतर है, क्योंकि सैंपल जल्दी जाँच में जाना चाहिए।
- घर पर लिया हो तो कंटेनर को शरीर के तापमान के पास रखें और 30 से 45 मिनट के भीतर पहुँचाएँ।
- सैंपल लेने का सही समय बताएँ और यदि कोई हिस्सा छूट गया हो तो अवश्य सूचित करें।
SQA सीमेन एनालाइज़र क्या मापता है
हमारे यहाँ SQA ऑटोमेटेड सीमेन एनालाइज़र का उपयोग होता है। यह मशीन सैंपल को ऑप्टिकल तरीके से पढ़ती है, जिससे बहुत बड़ी संख्या में शुक्राणुओं का आकलन कम समय में और आँख से गिनती में होने वाली त्रुटि के बिना हो जाता है।
यह वे सभी मान देती है जो डॉक्टर को चाहिए — वीर्य की मात्रा, शुक्राणु सांद्रता, कुल संख्या, प्रोग्रेसिव और कुल गतिशीलता, गतिशील शुक्राणु सांद्रता तथा बनावट से जुड़े सूचकांक। एक ही कैलिब्रेटेड मशीन होने से दोबारा की गई जाँच की तुलना भरोसे के साथ की जा सकती है।
फिर भी पैथोलॉजिस्ट हर रिपोर्ट क्यों देखते हैं
मशीन तेज़ और एकरूप है, पर पूरी जाँच नहीं। सिटी पैथोलॉजी लेबोरेटरी में सैंपल माइक्रोस्कोप से भी देखा जाता है और रिपोर्ट जारी होने से पहले हमारे पैथोलॉजिस्ट उसे वेरिफाई करते हैं।
इस जाँच से वे बातें जुड़ती हैं जो मशीन नहीं बताती — लिक्विफैक्शन का समय, गाढ़ापन, रंग और रूप, पस सेल, रक्त कोशिकाएँ, एपिथीलियल सेल या बैक्टीरिया की उपस्थिति, शुक्राणुओं का आपस में चिपकना, और संदेह की स्थिति में बनावट की पुष्टि। यदि मशीन का मान और माइक्रोस्कोपिक चित्र मेल न खाएँ तो सैंपल दोबारा जाँचा जाता है।
रिपोर्ट को घबराए बिना समझें
संदर्भ मान जनसंख्या आधारित निचली सीमाएँ हैं, पास-फेल की रेखा नहीं। थोड़ा कम मान का अर्थ यह नहीं कि गर्भधारण असंभव है, और सामान्य रिपोर्ट अकेले हर समस्या को खारिज नहीं करती।
रिपोर्ट में ओलिगोज़ूस्पर्मिया (कम संख्या), एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (कम गतिशीलता), टेराटोज़ूस्पर्मिया (असामान्य बनावट अधिक) या एज़ूस्पर्मिया (शुक्राणु न दिखना) जैसे शब्द आ सकते हैं। इनका अर्थ आपके इतिहास और जाँच के साथ डॉक्टर ही बता सकते हैं।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है, निदान या इलाज की सलाह नहीं। अपनी रिपोर्ट पर निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से चर्चा करें।
